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  • kuldeepanchal9

रोग

शारीरिक रोग दो प्रकार के होते हैं | एक ऐसा रोग, चिकित्सक के उपचार के द्वारा इन रोगों का

निदान किया जाता है जैसे खांसी,जुकाम,ज्वर इत्यादि | दूसरे प्रकार के रोग जो मानव के मन मस्तिष्क में उत्पन्न होते हैं जिनके उपचार के लिए किसी भी चिकित्सक की आवश्यकता नहीं होती ये ऐसे रोग होते हैं जो स्वयं के साथ-साथ दूसरों को भी पीड़ा देते हैं तथा इनकी अग्नि में स्वयं ही जलना होता है | लेकिन इन रोगों का निदान आपके स्वयं के पास होता है ये रोग लोभ, क्रोध, छल, कपट,ईर्ष्या,द्वेष, जलन इत्यादि हैं इन रोगों को कभी भी अपने मन मस्तिष्क पर हावी न होने दें | आत्मा,मन,वचन के आधार पर कर्म करके जीवन को आनंदमयी बनाएं |

***डॉ पांचाल



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