top of page
Search
  • kuldeepanchal9

हम बदल गये हैं

कोई भी इस भ्रंम में न रहे कि हम बदल गये हैं

हम जैसे पहले थे वैसे ही हैं पहले भी बुरे थे आज कुछ के लिए भी बुरे हैं

पहले भी कटु सत्य कहने में कोई संकोच.नहीं करते थे आज भी

ऐसा ही कटु सत्य बोलते हैं

नीम के पत्ते की तरह ही ठीक हैं कि कोई चबाकर तो नहीं खाना चाहेगा

*** डॉ पांचाल



27 views0 comments
Post: Blog2_Post
bottom of page