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  • kuldeepanchal9

श्री आचार्य रजनीश

आचार्य श्री रजनीश जी ने जो प्रवचन दिए शायद वो अच्छी तरह से सुने ही नहीं गये या प्रयास नहीं किया गया केवल एक सन्देश सम्भोग से समाधि तक कहना क्या अनुचित था ? बिना सम्भोग के सृष्टि की कल्पना भी व्यर्थ है बिना सम्भोग के कोई भी प्राणी अपनी प्रजाति का विस्तार नहीं कर सकेगा लेकिन श्री रजनीश के एक सन्देश को स्वीकार नहीं किया गया संतों के द्वारा उनका बहिष्कार किया गया भारत देश में सब कुछ होता है लेकिन स्पष्ट,सत्य व् कटु कोई सुनना पसंद नहीं करता | उनके प्रवचन को सुनकर बहिष्कार किया जाता तो उचित होता लेकिन कटु व् सत्य को स्वीकार करने की क्षमता शायद नहीं रही यही कारण रहा संतो के द्वारा उनका बहिष्कार | राधे माँ,निर्मल बाबा,रामपाल आदि का बहिष्कार करने की शक्ति व् क्षमता संतों में नहीं है | अमेरिका की प्रजा कोई मंद बुद्धि नहीं थी जिन्होंने उनके प्रवचनों को प्राथमिकता प्रदान की उनके बताये मार्ग पर चले लेकिन भारतीय संतों के मन मस्तिष्क को यह भी स्वीकार नहीं था | अपने अपने समय व् काल में सभी का बहिष्कार किया गया चाहे वह श्रीराम,श्रीकृष्ण, ईसा मसीह व् कबीर आदि ही क्यों न हो ? एक बार श्री रजनीश द्वारा दिए गये प्रवचनों को ध्यान से सुन लें तो शायद जीवन में कुछ परिवर्तन आ सके |

*** डॉ पांचाल


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