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  • kuldeepanchal9

मैं उनको दूंढ रहा हूँ भाग 3

स्वतंत्रता की नीव रखने वाले मातादीन वाल्मीकि को मैं दूंढ रहा हूँ

1. *पुर्वोतार भारत में स्वतंत्रता की जोत जलाने वाले मनीराम दीवान व् पियोली बरुआ को मैं दूंढ रहा हूँ

2 *चमक उठी सन सतावन में वह तलवार पुराणी थी बुदेलो के मुंह हमने सुनी यही कहानी थी अपनी झाँसी नहीं दूँगी कहने वाली व् अंग्रेजो को धुल चटाने वाली रानी लक्ष्मीबाई को मैं दूंढ रहा हूँ

3 *तेजस्वनी मात्र शक्ती वीरांगना साहस त्याग की प्रतिमूर्ति प्रेरणाश्रोत की मूर्त साहसी वीरमाता जीजावाई को मैं दूंढ रहा हूँ

4* कहा कलम ने लिखने को जब वीरो का इतिहास वीर पुरुष उज्जवल चरित्र हो जिसने दिया प्रकाश खूब छकाया था शत्रु को परचम स्वराज का लहराया वीर शिवाजी से बढ़कर तब नाम न कोई आया ऐसे कुशल सम्राट सरदेशमुखी वीर शिवाजी को मैं दूंढ रहा हूँ

5 * ढाल बने वीर शिवा की दुश्मन को खूब छकाया यूँ थी शान मराठो की स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाया बलिदान दिया जो बाजी ने है न ऐसी कोई मिसाल इस सपूत के साहस से भारत माता हुई निहाल कभी युद्ध न हारने वाले अपराजित बाजीराव को मैं दूंढ रहा हूँ

6 * बाज नहीं खगराज नहीं आसमान में उड़ने वाले प्रताप के घोड़े चेतक को मैं दूंढ रहा हूँ

7 चुण्डावत मांगी सेनानी सर काट दे दिया क्षत्राणी सर काटने वाली राष्ट्र के लिए अपना सिर बलिदान करने वाली हाड़ी रानी को मैं दूंढ रहा हूँ

8 देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले आदिवासी जन नायक बिरसा मुंडा को मैं दूंढ रहा हूँ

9 मारो या मरो इन गोरों से न डरो जिन्हें लड़ना है जुल्म के विरुद्ध वे वीर आगे आयें बाकी चुप बैठें या घर जाएँ सत्तावन की क्रांति के महान वीर कोतवाल धन सिंह गुर्जर को मैं दूंढ रहा हूँ

10 ८० वर्ष की आयु में ज्यादा जोश पुराना था सब कहते हैं की बाबु वीर कुंवर सिंह वीर मरदाना था सत्तावन के वीर योद्धा अंग्रेजो को सात बार मात देने वाले वीर कुंवर को मैं दूंढ रहा हूँ

11 जब औरंगजेब ने सभा में कहा मुगलों का काल राजा छत्रसाल नर हिन्द केसरीवीर बुंदेला महाप्रतापी महाराजा छत्रसाल जू देव को मैं दूंढ रहा हूँ

12 रानी लक्ष्मीबाई के स्वामी भक्त घोड़े बादल, पवन व् सारंगी को मैं दूंढ रहा हूँ

13 स्वामी भक्ति का रूप एवम महाराणा प्रताप के योद्धा हाथी जिसने अकबर के चारा को स्वीकार नहीं किया ऐसे हाथी रामप्रसाद को मैं दूंढ रहा हूँ

14 तू शुद्ध है तू बुद्ध है तू है निरंजन सर्वदा संसार माया से रहित तू स्वरुप स्थित सर्वदा कहने वाली संस्कारी माता रानी मदालसा को मैं दूंढ रहा हूँ


15 बन्दूक बड़ी बेवफा माशूका होती है कब किधर मुंह मोड़ ले कोई भरोसा नहीं दे सलामी इस तिरंगे को जिस पर तेरा अभिमान है सर हमेशा ऊँचा रखना जब तक दिल में जान है कहने वाले मंगल पांडे को मैं दूंढ रहा हूँ

16 चिंगारी आज़ादी की सुलगी मेरे जश्न में हैं इन्कलाब की जवालायें लिपटी मेरे बदन में हैं मौत जहाँ जन्नत हो ये बात मेरे वतन में हैं क़ुरबानी का जज्बा जिन्दा मेरे कफन में हैं दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे आजाद है आजाद रहेंगे भारत की फिजाओ को सदा याद रहूँगा आजाद था आजाद हूँ आजाद रहूँगा सदैव आजाद रहने वाले चन्द्र शेखर आजाद को मैं दूंढ रहा हूँ

17 राष्ट्रवाद के सबसे शक्तिशाली अहिंसावादी लाल बाल पाल की तिकड़ी को मैं दूंढ रहा हूँ

18 मेरे सीने पर जो जख्म है वो फूलो के गुच्छे हैं हमको पागल ही रहने दो हम पागल ही अच्छे हैं कहने वाले क्रान्ति कारी भगत सिंह को मैं दूंढ रहा हूँ

19 मेरा रंग दे बसंती चोला कहने वाले क्रांतिवीरों तीन मूर्ति भगत राजगुरु सुखदेव को मैं दूंढ रहा हूँ

20 मात्र भूमि की खातिर मुझे मौत से बड़ा सम्मान क्या दिया जा सकता है व् परदेश में जाकर जलिया कांड का प्रतिशोध लेने वाले उधम सिंह को मैं दूंढ रहा हूँ

21 सरफरोसी की तमना अब हमारे दिल में है कहने वाले राम प्रसाद बिस्मिल को दूंढ रहा हूँ

22 जाऊंगा खाली हाथ मगर ये दर्द साथ ही जायेगा किस दिन हिन्दोस्तान आजाद वतन कहलायेगा कहने वाले अशफाकुल्ला खान को मैं दूंढ रहा हूँ

23 तुम मुझे खून दो मैं आजादी दूंगा कहने वाले नेताजी को मैं दूंढ रहा हूँ

24 लोहा भले ही गरम हो जाये लेकिन हथोडे को तो ठंडा ही रहना चाहिए कहने वाले लोह पुरुष सरदार पटेल के भारत को मैं दूंढ रहा हूँ

25 शरीर पर ८० घाव होने के बाद केवल धड से लड़ते हुए वीर सांगा को मैं दूंढ रहा हूँ

26 अफगान महिलाये अपने बच्चो को चुप कराने के लिए कहती थी सो जाओ नहीं तो नालवा आ जायेगा उन हरी सिंह नालवा को मैं दूंढ रहा हूँ

२७ जब तक तुम्हारी रानी की नसों में रक्त की एक भी बूंद है तब तक कित्तूर को कोई नहीं छीन सकता कहने वाली रानी चेनमा को मैं दूंढ रहा हूँ

28 आर्य समाज की स्थापना व् वेदों को पुनर्जीवित करने वाले महर्षि दयानंद को मैं दूंढ रहा हूँ

29 दांतों में ऊँगली दबे हुए मौत भी खड़ी रही फोलादी सैनिक इस तरह लड़े अंग्रेज सैनिक यही दुआ मांगते रहे फिर कभी किसी तात्या से पाला न पड़े स्वन्त्रता संग्राम के अग्रणी वीर योद्धा तात्या टोपे को मैं दूंढ रहा हूँ

30 सत्तावन की क्रांति के महानायक अंग्रेजो के शासन के विरुद्ध विद्रोह करने वाले क्रांति वीर तुला राम को मैं दूंढ रहा हूँ

31 स्वाधीनता संघर्ष के महानायक गीता हाथ में लेकर हँसते हुए फांसी के फंदे को चूमने वाले खुदीराम बोस को मैं दूंढ रहा हूँ

३२ राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ न्युचावार करने वाली रोटी के अतिरिक्त बम बनाने वाली आयरन लेडी दुर्गावती भाभी को मैं दूंढ रहा हूँ

*आर्य हिन्दू की जान कहाँ है मेरा हिंदुस्तान मैं उसको दूंढ रहा हूँ

*न बर्मा न श्रीलंका न भूटान न नेपाल न बांग्लादेश न अफगानिस्तान न पाकिस्तान वो पूरा पूरा हिंदुस्तान मैं उसको दूंढ रहा हूँ

*कहाँ गये श्रीक्रिशन श्री राम और प्रातकाल इनको कराने वाले स्नान मैं उनको दूंढ रहा हूँ

*जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा उस भारत को मैं दूंढ रहा हूँ

*वो मेरे खेत मेरे खलिहान पहाड़ी झरनों के संगीत कहाँ गयी पहले वाली प्रीत मैं उस भारत को दूंढ रहा हूँ

अंत में कुछ पंक्तियों के साथ इस शीर्षक को विराम देता हूँ




कर सको तो अपनी वाणी में वो असर पैदा करो

रुख हवाओं का बदल सको वो हुनर पैदा करो

जीना चाहते तो अगर इस देश में सम्मान से

तो हर घर में भारतीय पैदा जरूर करो






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