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  • kuldeepanchal9

मैं उनको दूंढ रहा हूँ भाग २

पराक्रमी बुद्धिमान बेताल पचीसी सिंहासन बतीसी इंद्र देवता के दरबार में न्याय करने वाले विक्रम संवत की शुरुआत करने वाले चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य को मैं दूंढ रहा हूँ

2 निर्वासित तिरस्कार होने पर अभिज्ञानशाकुन्तल के रचेता कालिदास को मैं दूंढ रहा हूँ

3 राम नाम मनिदीप धरू जीह देहरी द्वार व् रामचरित्र मानस लिखने वाले तुलसी दास को मैं दूंढ रहा हूँ

4 क्या क्या दोहे कह गया नैनो का अंध फ़कीर श्रीक्रिशन के सौन्दर्य का वर्णन करने वाले सूरदास को मैं दूंढ रहा हूँ

5 बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिल्या कोई जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा न कोई कहने वाले समाज को नयी राह दिखने वाले संत कबीर को मैं दूंढ रहा हूँ

*6 मैत्री का ज्वलंत उदाहरण श्री क्रिशन जी द्वारा अपने आसुओं से चरण धोने वाले मित्र सुदामा को मैं दूंढ रहा हूँ

*7 गुरुत्वाकर्षण की खोज करने वाले व् सिधांत शिरोमणि ग्रन्थ की रचना करने वाले प्रसिद्ध गणितज्ञ भास्कराचार्य को मैं दूंढ रहा हूँ

*8 चारागाह में खेलते बालक का हाथ पकड़कर सम्राट बना देने वाले आचार्य चाणक्य को मैं दूंढ रहा हूँ

गुरु की प्रतिज्ञा पर सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बाधने वाले चन्द्र गुप्त को मैं दूंढ रहा हूँ

*9 भारत वर्ष के नव निर्माता महापराक्रमी अखंड भारत का निर्माण करने वाले मृत्यु का दूसरा नाम कहलाने वाले पंडित पुष्यमित्र शुंग को मैं दूंढ रहा हूँ

*10 अहंकारी सिकंदर को परास्त करने वाले व् भारत भूमि से खदेड़ने वाले राजा पुरु को मैं दूंढ रहा हूँ

* 11 पराजित शर्मशार होकर सेलुकस द्वारा उसकी सुपुत्री को सुरक्षित रखने वाले विश्व राजन चन्द्रगुप्त को मैं दूंढ रहा हूँ

12 मृत्यु का दूसरा नाम सम्राट समुन्द्रगुप्त सदैव अपराजित रहने वाले भारत के नेपोलियन स्मुन्द्रगुप्र को मैं दूंढ रहा हूँ

* 13 जिन्होंने रोका राजाओ का युद्ध लोग कहते उन्हें शांति का स्वरुप नाम है उनका महात्मा बुद्ध राजपाट त्याग कर शांति का सन्देश देने वाले महात्मा बुद्ध को मैं दूंढ रहा हूँ

* 14 अहिंसा तप सत्य की शिक्षा देने वाले तीर्थंकर महावीर जी को दूंढ रहा हूँ

15 कीर्ति मान महान शासक अष्टदिग्गज की स्थापना करने वाले राजा क्रिशन देव को मैं दूंढ रहा हूँ

*16 राज धर्म पर किया प्यारा पुत्र बलिदान ममता से उपर था मात्रभूमि का स्वाभिमान अपने राजन के प्राणों को बचाकर अपने दिल के टुकड़े के प्राणों की आहुति देने वाली पन्ना दाई को दूंढ रहा हूँ

*17 जिनके झंडे में हनुमानजी का चित्र अंकित था आज भी काबुल चिल्ला रहा है बंद करो फाटक रणजीत सिंह आ रहा है समस्त हिन्दू धर्म के रक्षक कुशल शासक साहसी वीर शेरे पंजाब महाराजा रणजीत सिंह को मैं दूंढ रहा हूँ

*18 जुल्मी के फरमान से लाखों हिन्दुओ को तार दिया अहसान हिन्द की पुश्तों पर धर्म यथार्थ शीश वार दिया धर्म की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व नोछवर कर हिन्द की चादर कहलाने वाले गुरु तेग बहादुर को मैं दूंढ रहा हू

* 19 सवा लाख से एक लडाऊ चिड़ियाँ ते मैं बाज तुडाऊ कहने वाले गुरु गोविन्द सिंह मैं को दूंढ रहा हूँ

20 *गुरुओ के गुरु पुत्रों ने चिर बलिदान भर दिया उन पुत्रो को मैं दूंढ रहा हूँ

मुग़ल शासन को चकनाचूर करने वाले वीर बहादुर बन्दा सिंह को मैं दूंढ रहा हूँ

21 *अपने स्वर राग से दीपक जलाने वाले तानसेन को मैं दूंढ रहा हूँ

*22 वो चलाता शब्दभेदी बाण था अखंड शक्ति का वो प्रमाण था जिसे रोक ना पाए वो ऐसा अग्नि बाण था इस धरा का वो वीर पुत्र पृथ्वी राज चौहान था ऐसे वीर योद्धा सम्राट पृथ्वी राज चौहान को मैं दूंढ रहा हूँ

23 *फीका पडा थे तेज सूरज का जब माथा ऊँचा करता था फीकी हुयी बिजली की चमक जब जब आँख खोली प्रताप ने जब जब तेरी तलवार उठी तो दुश्मन टोली खेल गयी फीकी पड़ी दहाड़ शेर की जब जब तूने हुंकार भरी ऐसे शूर वीर महाराणा प्रताप को मैं दूंढ रहा हूँ

झुक गये नबाब झुक गये मुग़ल झुक गया गगन सारा जो कभी नहीं झुका ऐसा हिन्दू वीर था राजा सूरजमल जाट हमारा ऐसे राजा सूरजमल को मैं दूंढ रहा हूँ


24 *वह धन्य देश की माट्टी है जिसमे भामा सा लाल पला

उस दानवीर की यश गाथा को मेट सका क्या काल भला

उस दानवीर भामाशाह मैं को दूंढ रहा हूँ

25 अमर प्रेम का प्रतीक वीर लोरिक पत्थरवीर लोरिक पत्थर, एक विशालकाय दो टुकड़ो में खंडित पत्थर, जिस पत्थर को यादवो के वीर अहीर राजा लोरिक ने तलवार के एक ही प्रहार से चीर दिया था, मैं उसको दूंढ रहा हूँ

26 दो तरफ समुन्द्र एक तरफ हिमालय चौथी और स्वयं प्रतिहार थे हर बार युद्ध में अरबो को हराया प्रतिहार मिहिर भोज ऐसे प्रहार थे जिनके राज में भारत था सोने की चिड़िया उस महान सनातन धर्म रक्षक सम्राट मिहिर भोज को मैं दूंढ रहा हूँ

27 *पत्र व् तलवार दोनों के उपयोग से युद्ध जीतने का कौशल रखने वाली धरम परायण मंदिरों की स्थापना करने वाली राज्य के प्रत्येक आदेश पर श्रीशंकर लिखने वाली शिवभक्त अहिल्याबाई होल्कर को मैं दूंढ रहा हूँ

28 *स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजो के पैरो को मात्र भूमि से उखाड़ने वाली व् अपना छीना हुआ राज्य वापिस लेने वाली रानी वेलु नाचियार को मैं दूंढ रहा हूँ

२९ अपनी अस्मिता आन बान शान को बचाकर जौहर करने वाली रानी पद्मावती को मैं दूंढ रहा हूँ

३० महान शासक महाराणा कुम्भकरण के नाम से प्रसिद्ध मेवाड़ को स्वर्णयुग बनाने वाले महाराणा कुम्भा को मैं दूंढ रहा हूँ

*** डॉ पांचाल



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