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  • kuldeepanchal9

मनुष्य के जीवन में समुन्द्र रुपी लहरें

मनुष्य का जीवन भी समुन्द्र की तरह ही है जिस प्रकार समुन्द्र में लहरें आती रहती हैं कभी रेत के कण छोड़ जाती है कभी कीटाणु विषाणु छोड़ जाती है लेकिन कभी कभी मोती जैसे रत्न भी छोड़ जाती है इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में कुछ लहरें दुःख, चिंता व् संताप छोड़ जाती हैं लेकिन कभी कभी सुख, आनंद व् परमानन्द के क्षण छोड़ जाती हैं यही भाग्य का लेख है |

*** डॉ पांचाल


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