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  • kuldeepanchal9

मनुष्य की मानसिकता

मनुष्य का मन बहुत ही विचित्र है चाहे वह स्त्री हो या पुरुष सभी को वर्तमान में ही प्रशंसा अच्छी लगती है यदि कोई स्त्री स्वादिष्ट भोजन बनाने में पारंगत है तो उसे वर्तमान की प्रशंसा अच्छी लगेगी न कि पिछले भोजन को स्वादिष्ट कहने से | इसी प्रकार एक उदाहरण सभी पर अमल होता है यदि कोई मनुष्य सुखी जीवन व्यतीत कर रहा है तो वह सोचता है कि इसी जीवन के कर्म के आधार पर ही सुखी जीवन है दूसरी तरफ यदि कोई दुखी जीवन व्यतीत कर रहा है और उसको यह कहा जाये कि यह जीवन पुराने कर्मों के आधार पर ऐसा है तो वह बहुत ही संतुष्ट होता है लेकिन यदि यह कहा जाये कि वर्तमान जीवन के कर्मों के आधार पर आपका या जीवन है तो वह बहुत ही हतोत्साहित होगा |

यह प्रत्येक मनुष्य की मानसिकता है किसी विशेष की नहीं


***डॉ पांचाल


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