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  • kuldeepanchal9

मनुष्य का मस्तिष्क व् ब्रह्माण्ड

मनुष्य का मस्तिष्क ब्रह्माण्ड की तरह ही है मनुष्य के मस्तिष्क का केवल पांच प्रतिशत हिस्सा ही कार्य करता है उसी प्रकार हम भी केवल ब्रह्माण्ड के पांच प्रतिशत को ही समझने में समर्थ रहे हैं | ब्रह्माण्ड में तारों की संख्या अनगिनत है उसी प्रकार मनुष्य के केशों की तथा मनुष्य के मन मस्तिष्क में विचारों व् कल्पनाओं की गिनती करना असंभव है पल पल मनुष्य के जीवन में इतने विचार व् कल्पनाएँ जन्म लेती हैं कि सम्पूर्ण जीवन में उनको समझना व् गिनती करना समझ से परे है |

*** डॉ पांचाल


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