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  • kuldeepanchal9

अर्जन,सृजन व् विसर्जन


कुछ भी प्राप्त करने के लिए या अर्जन व् सृजन करने में कठिन परिश्रम व् पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है | चाहे वह परमात्मा से अंतर्ध्यान में मिलन हो, शिक्षा हो,योग्यता हो, धन हो, स्वस्थ तन हो,पद हो ,प्रतिष्ठा हो,वैभव हो, आदर मान सम्मान हो, चरित्र निर्माण, भवन निर्माण या सुखमय जीवन इस सबका अर्जन व् सृजन करना सरल नही होता है | लेकिन इनके समाप्त व् विसर्जन में क्षणिक समय लगता हैं |

*** डॉ पांचाल


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