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  • kuldeepanchal9

अपने व् पराये

मनुष्य को अपने पराये का ज्ञान अवश्य होना चाहिए | युद्ध से पूर्व अर्जुन ने भी श्री कृष्णजी से निवेदन किया था कि मेरे रथ को दोनों सेनाओं के मध्य ले चलो क्यूँ कि मैं भी यह जानने के लिए उत्सुक हूँ कि सुख दुःख में कौन मेरे साथ हैं तथा कौन मेरे विरुद्ध ? इसी प्रकार एक साधारण मनुष्य को भी यह ज्ञात रखना आवश्यक है कि उसके सुख दुःख में कौन साथ है तथा कौन उसके विरुद्ध है ?

*** डॉ पांचाल


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